Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय डेटा केंद्र और एमएसएससी के लिए 50 करोड़ रुपये की मंजूरी
Rs 50 crore approved for National Data Centre and MSSC in Himachal Pradesh
केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय डेटा केंद्र और नगरपालिका साझा सेवा केंद्रों (एमएसएससी) की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप यह स्वीकृति प्राप्त हुई है।
नगरपालिका प्रशासन को डिजिटल और तकनीकी मजबूती
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को आधुनिक बनाने और नगरपालिका प्रशासन को अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार सीमित संसाधनों, जनशक्ति और तकनीकी चुनौतियों को दूर करने की दिशा में कार्य कर रही है। एमएसएससी मॉडल शहरी निकायों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगा और सेवा वितरण में सुधार लाएगा।
एमएसएससी के मुख्य लाभ
- पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह कार्य करेंगे, जहां जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, शिकायत निवारण जैसी सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी।
- केंद्रीकृत प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करेंगे, जिससे लेखा, पेरोल प्रबंधन और विक्रेता भुगतान में पारदर्शिता आएगी।
- कर संग्रह, अपशिष्ट प्रबंधन और रखरखाव सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से नागरिकों तक पहुंचेंगी।
- छोटे शहरी निकायों की दक्षता में वृद्धि होगी, जिससे नागरिकों को डिजिटल और सुगम सेवाएं मिलेंगी।
अनुदान वितरण और निगरानी प्रक्रिया
- धनराशि दो चरणों में वितरित की जाएगी – 50% राशि स्वीकृति के समय और शेष एमएसएससी के संचालन शुरू होने के बाद दी जाएगी।
- राज्य सरकार एक राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र निगरानी एजेंसी नियुक्त करेगी, जो परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मूल्यांकन को सुनिश्चित करेगी।
- यह योजना लागत में कमी, संसाधनों के अधिकतम उपयोग और सेवा वितरण में तेजी लाने में सहायक होगी।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड को भी यह अनुदान जारी करने का प्रस्ताव मंजूर किया है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय डेटा केंद्र और एमएसएससी की स्थापना से नगरपालिका प्रशासन डिजिटल और अधिक प्रभावी होगा। इससे शहरी स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।


